Friday, 1 July 2016

मेरे प्रभु हनुमान से प्राथना


हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार |पवनसुत विनती बारम्बार ||अष्ट सिद्धि नव निद्दी के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविदाता |सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उधार ||अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी |भक्ति भाव से ध्याऊं तुम्हे, कर दुखों से पार ||जपूं निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा |राम भक्त मोहे शरण मे लीजे भाव सागर से तार ||

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